शुक्रवार, 26 जून 2015

भांटा मुरई


।। भांटा मुरई ।। 


आज रांधे हे घर में भांटा मुरई
लकर धकर मे होगे अधकुचरा चुरई
दाई ह चुप हे होगे बबा के चिल्लई
छोटकी ह सुसकत हे होगे करलई
सटकगे बहू के रंग रंग के बोलई
कुरिया मे खुसरके होगे रोवई
लइका ल भुलागे पियाय बर दवई
मीठ मीठ बोलके "माटी" के मनई
जाना हे जल्दी बाबू ल गंवई
पेट नई भरीस आजके खवई
आज रांधे हे घर में भांटा मुरई 

रचनाकार - महेंद्र देवांगन "माटी"
      राजिम छत्तीसगढ़ 
+91 86 02 407353

1 टिप्पणी:

  1. गुरूजी बड़ सुग्घर रचना हे ग।
    अऊ ब्लाग के दुनिया म सुवागत हे।
    रचना बर बहुत बहुत बधाई।

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