।। भांटा मुरई ।।
आज रांधे हे घर में भांटा मुरई
लकर धकर मे होगे अधकुचरा चुरई
दाई ह चुप हे होगे बबा के चिल्लई
छोटकी ह सुसकत हे होगे करलई
सटकगे बहू के रंग रंग के बोलई
कुरिया मे खुसरके होगे रोवई
लइका ल भुलागे पियाय बर दवई
मीठ मीठ बोलके "माटी" के मनई
जाना हे जल्दी बाबू ल गंवई
पेट नई भरीस आजके खवई
आज रांधे हे घर में भांटा मुरई
रचनाकार - महेंद्र देवांगन "माटी"
राजिम छत्तीसगढ़
+91 86 02 407353
राजिम छत्तीसगढ़
+91 86 02 407353

गुरूजी बड़ सुग्घर रचना हे ग।
जवाब देंहटाएंअऊ ब्लाग के दुनिया म सुवागत हे।
रचना बर बहुत बहुत बधाई।