छत्तीसगढ़ी गीत - पढ़हे ल जांहू
-------------------------------------
ये दाई ओ ये ददा ग
मोरो बर लेदे बस्ता 2
पढ़हे ल जांहू संगवारी मन संग-2
नई राहों निच्चट अढ़हा |ये दाई.....
पढ़ लिखके मै सैनिक बनहूं
देश के सेवा करहूं
देश के खातिर जीहूं दाई
देश के खातिर मरहूं
दुशमन के मै छक्का छोड़ाहूं-2
नइ देवौं मैंहा रसता
ये दाई ओ....
फोकट मे कापी पुस्तक बांटत हे
नई लागे तुमन ल खरचा
शिक्षा के अधिकार बनाहे
गांवे मे होवत हे चरचा
पढ़ लिख के मै साक्षर बनहूं-2
रोको झन मोरे रसता
ये दाई....
छोटू पप्पू प्रिया साक्षी
सब झन पढहे ल जाथे
किसम किसम के गीत कहानी
अपन घर मे सुनाथे
मंहू ह पुस्तक पढहूं दाई-2
मगन होके मस्त
ये दाई ओ...
पढ लिखके हुशियार मे बनहूं
सबके हिसाब ल राखहूं
सेठ साहूकार ठगे नई सके
सबला मेंहा जानहूं
देख सुनके सब चीजे बिसाबो-2
कोने मांहगा कोने सस्ता
ये दाई ओ.........
पढहे ल जाहूं..............
*****************************


कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें