बुधवार, 22 जुलाई 2015

गांव ल झन भुलाबे

गांव ल झन भुलाबे
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शहर मे जाके शहरिया बाबू, गांव ल झन भुलाबे
नानपन के संगी साथी ल, सुरता करके आबे
गांव के धुर्रा माटी म खेलके, बाढहे हे तोर तन ह
आमा बगीचा अउ केरा बारी मं, कइसे लगे राहे तोर मन ह
आवाथे तिहार बार ह, सुरता करके आबे
शहर मे जाके शहरिया बाबू गांव ल झन भुलाबे

सुरता कर लेबे पीपर चंउरा ल, अउ गुल्ली डंडाके खेल ल
गांठ बांध ले बबा के बात ल, अउ मीत मीतान के मेल ल
हिरदय मे अपन राखे रहिबे, मया ल झन बिसराबे
शहर मे जाके शहरिया बाबू, गांव ल झन भुलाबे

दया मया ल राखे रहिबे, नता रिशता ल झन भुलाबे
सुघ्घर सबके मान गउन करबे, अपन फरज निभाबे
आंसु बोहावत देखत रहिथे, दाई के सुरता करके आबे
शहर मे जाके शहरिया बाबू, गांव ल झन भुलाबे

छुटगे होही अंगाकर रोटी ह, अब तो तंदुरी ल खावत होबे
इडली डोसा खा खाके, अब्बड मजा पावत होबे
कतको खाले आनी बानी के फेर, तावा रोटी के सवाद कहां पाबे
शहर मे जाके शहरिया बाबू, गांव ल झन भुलाबे


✒ महेन्द्र देवागंन "माटी"
  ( बोरसी - राजिम वाले ) 
  गोपीबंद पारा पंडरिया
  जिला - कबीरधाम ( छ. ग )
    मो. नं- 8602407353
8602407353

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