वंदेमातरम्
वाह रे बोटर्रा पाकिस्तान,
तींही तो आतंकवाद के खदान।
आय बांय झन बखान,
सम्हाल ले अब तोर ज़बान।।
तोर हथियार ल तोरे,
करा सजा के रख।
काश्मीर तौर बपौती नोहय,
घेरी बेरी काश्मीर झन रट।।
जादा झन उकसा हमला,
संगवारी बर हम त्यागी अन।
झन छुबे ज़र जबे ,
बईरी दुश्मन बर आगी अन।।
वतन के ख़ातिर जीथन मरथन,
जान ले प्यारा हिँदुस्तान।
छाती अड़ा के तियार खड़े हे,
हमरो कतको वीर ज़वान।।
अब जादा अतलंग करबे,
ते दौड़ जबो पूरा हिँदुस्तान।
हमुमन महतारी के दूध पिये हन,
मिटा देबो तोर नामोनिशान।।
कवि - अशोक साहू
गांव - भानसोज आरंग रायपुर
मोबा. 9685704705
बहुत सुंदर कविता हे साहू जी .......
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