।। करो योग रहो निरोग ।।
थोरकुन तो अपन देह के सोग ल क़र।
खवई-पियइ-सुतई म झन रोग ल धर।।
बिहनिया ले नहा धोके सरकी जमा।
'योग' के आसन बर हाथ गोड़ लमा।।
आनी-बानी के आसन 20 मिनट कर।
प्रनायाम करे बर थोकिन ध्यान धर।।
अतके म जम्मो बीमारी दुरिहा जही।
रोज करबे त केन्सर घलो भगा जही।।
न कोनो चिड़चिड़ासी न लगय थकासी।
मुहु म चमक रही फिट रहिबे जी काँसी।।
बुधारू,समारू अऊ मयारू जम्मो करबो।
निरोगी देह पहली सुख सियानगोठ धरबो।।
जम्मो दुनिया ल घलो चलना जी सीखाबो।
हमर भारत भुइया ल फेर बिश्वगुरु बनाबो।।
✏ सुनिल शर्मा "नील"
थान खम्हरिया,बेमेतरा
मोबा. 9755554470
रचना- 22 जून 2015
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