गुरुवार, 2 जुलाई 2015

करो योग रहो निरोग


।। करो योग रहो निरोग ।। 


थोरकुन तो अपन देह के सोग ल क़र।
खवई-पियइ-सुतई म झन रोग ल धर।।
बिहनिया ले नहा धोके सरकी जमा। 
'योग' के आसन बर हाथ गोड़ लमा।।

आनी-बानी के आसन 20 मिनट कर।
प्रनायाम करे  बर थोकिन ध्यान धर।। 
अतके म जम्मो बीमारी दुरिहा जही।
रोज करबे त केन्सर घलो भगा जही।।

न कोनो चिड़चिड़ासी न लगय थकासी।
मुहु म चमक रही फिट रहिबे जी काँसी।।
बुधारू,समारू अऊ मयारू जम्मो करबो।
निरोगी देह पहली सुख सियानगोठ धरबो।।

जम्मो दुनिया ल घलो चलना जी सीखाबो।
हमर भारत भुइया ल फेर बिश्वगुरु बनाबो।।

✏ सुनिल शर्मा "नील"
थान खम्हरिया,बेमेतरा
मोबा. 9755554470
रचना- 22 जून 2015
 morepankh.blogspot.com 

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