गुरुवार, 20 अगस्त 2015

अंध सरद्धा म जकड़े इंसान हे



।। अंध सरद्धा म जकड़े इंसान हे ।। 

आस्था के इंहा खुले जगा जगा दुकान हे
अंध अऊ सरद्धा म जकड़े इंसान हे

ढोंगी-पाखंडी अऊ चोर-उचक्का
लोभी पापी मन बन बईठे भगवान हे

अंध बिसवास के चारो मुड़ा बगरे अज्ञान हे
छोटे-बडे, पढ़े-लिखे सबो बनत उखर गुलाम हे

आश्रम के आड़ म होवत इंहा अनाचार हे
सन्त, महत्मा, बाबा बन करत इहां बैपार हे

चढ़ावा के नाम म भरत अपन भंडार हे
जिहां सरद्धा बिस्वास ले होवत खिलवाड़ हे


आज देस म हमर, ये का का होवत हे
देख के हिरदय ह मोर रोवत हे
देख के हिरदय ह मोर बड़ रोवत हे

✏ भारत धीवर 
हनुमान नगर मठपारा 
रायपुर छत्तीसगढ़ 7828441117 
bharatdhiwar1982@gmail.com

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