।। अंध सरद्धा म जकड़े इंसान हे ।।
आस्था के इंहा खुले जगा जगा दुकान हे
अंध अऊ सरद्धा म जकड़े इंसान हे
ढोंगी-पाखंडी अऊ चोर-उचक्का
लोभी पापी मन बन बईठे भगवान हे
अंध बिसवास के चारो मुड़ा बगरे अज्ञान हे
छोटे-बडे, पढ़े-लिखे सबो बनत उखर गुलाम हे
आश्रम के आड़ म होवत इंहा अनाचार हे
सन्त, महत्मा, बाबा बन करत इहां बैपार हे
चढ़ावा के नाम म भरत अपन भंडार हे
जिहां सरद्धा बिस्वास ले होवत खिलवाड़ हे
आज देस म हमर, ये का का होवत हे
देख के हिरदय ह मोर रोवत हे
देख के हिरदय ह मोर बड़ रोवत हे
✏ भारत धीवर
हनुमान नगर मठपारा
रायपुर छत्तीसगढ़ 7828441117
bharatdhiwar1982@gmail.com
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