।। छत्तीसगढ़ महिमा ।।
जय जय हे छत्तीसगढ़ महतारी
तोर महिमा जग मा बड़ भारी
ऋषि मुनि अऊ तपसी के डेरा
सबो जीव जंतु के तैंहा बसेरा
हरियर हे मैया तोर कोरा
रूप तोर मोहय चंद्र चकोरा
तीरथ तंही, तंही चारो धाम
पांव रखे जिंहा मोर प्रभु राम
बड़ निक लागे धनहा डोली
हवे सुग्घर तोर गुरतुर बोली
अन्न धन के तैंहा उपजईया
सबो प्राणी के प्रान बचईया
बड़े बिहना कोयली गुन गाये
चिरई चिरगुन महिमा बताये
नाचय रूखवा झुमरय खेती
भारत माँ के तैं दूलौरिन बेटी
नरवा, डोंगरी मन ला भाये
परबत मुकुट शोभा बढ़हाये
तोर चरण सब माथ नवांवय
तोर'दुलरवा',गुन तोर गांवय
रचनाकार - श्रवण साहू
गांव - बरगा जि. बेमेतरा (छ.ग.)
मोबा. - +918085104647
pawanchhattisgarh.blogspot.com
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