।। गोंदली के सेती ।।
मुड़ धरे मंत्री बइठे,सुकुरदुम सरकार
हाहाकार मचे हे भारी,कईसन अतियाचार
गोंदली के सेती
आँखी के आँसू सुखागे,कंहा गय ओ झार
कुरता पेंठ के थैली सुखागे,रोवय नर नार
गोंदली के सेती
कुकरा कुकरी मुड़ ओरमाये,सुते जाली तार
तोर बेचइया माछी मारय,कईसन बेरोजगार
गोंदली के सेती
नुन चाँट के दारु पिये बर,दरुहा हे लचार
निशा थोरको नई चढत हे,जिना हे बेकार
गोंदली के सेती
तोर बिना रसोई सुन्ना,रंधईया के जग अंधियार
काला रांधय कईसे रांधय,आगे हे अजार
गोंदली के सेती
काय करन कईसे करन,करत हे गोहार
कोन बूडोही कोन ऊबारही,कोन होही करतार
गोंदली के सेती
रचनाकार - ॠषि वर्मा
निनवा बैकुंठ तिल्दा रायपुर
मोबा. 9009087489
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