मंगलवार, 4 अगस्त 2015

सावन आगे


।। सावन आगे ।। 

आषाढ बुलग गे सावन आगे
हरियर हरियर मन भावन लागे
बेलपतिया उलहोवत हे
लाजवंती बेटी सिलहोवत हे

सावन सोमवारी उपास रखे हे
सुघ्घर दूल्हा के आस रखे हे
भाई बहिनी के प्रेम उमड़ही
बादर बरखा बर घूमड़ही

कारी कोयलिया कुहुक करत हे
साजन सजनी के छाती जरत हे
लहुट लहुट देखे मुड़ म बोहे
बईठ दुवारी रस्ता जोहे

चले कांवरिया शिव के धाम
छोड़ के सब्बो बुता काम
बोलबम बोलबम नारा गुंजही
गाँव गाँव अऊ पारा झूमही

धरही  तिरंगा बाजा बाजही
लईका मन बड़ नीक लागही
आसमान मे तिरंगा लहराही
अजादी के तिहार मनाही

हाथी घोड़ा पालकी
जय कन्हैया लाल की
आठे कन्हैया भिथिया बनाही
महूर मे सुंदर ओला रचाही

नर नारी सब गावन लागे
आगे सावन सावन आगे

रचनाकार - ऋषि वर्मा 
निनवा बैकुंठ 
तिल्दा रायपुर 
9009087489 

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