मंगलवार, 4 अगस्त 2015

नांगर मुठिया धरे नंगरिहा


                      ।। नांगर मुठिया धरे नंगरिहा ।। 

मुड़ म खुमरी, कमरा ओढ़े खा के चटनी-बासी
नांगर मुठिया धरे नंगरिहा डोली म करत हे बियासी

सुरुर-सुरुर पवन चलत हे,संग म धरे हे पानी
गड़-गड़ बाजय इंद्र के बाजा,नाचत हे बरखा रानी
झेंगुरा बपुरा गाना गावय मेचका ल छूटगे हांसी
नांगर मुठिया धरे नंगरिहा डोली म करत हे बियासी 

अरतता बइला ल खेदय,रेंगत गावत हे ददरिया
लकर-लकर बइला रेंगय,धरे बर हे अउ हरिया
बिछलत मेड़ बनिहारिन रेंगय चुहरही खार मटासी
नांगर मुठिया धरे नंगरिहा डोली म करत हे बियासी 

करिया-करिया बादर दिखय,मया जल बांटत हे
हांसत-कुलकत हे किसनहा,मारे खुशी के नाचत हे
धरती दाई घलो मगन हे,नइ दिखय कहूं उदासी
नांगर मुठिया धरे नंगरिहा डोली म करत हे बियासी

   रचनाकार - मनीराम साहू 'मितान'
कचलोन सिमगा 
बलौदाबाजार भाटापारा 
9826154608 

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