।। बरखा मन के सुहात ले ।।
नोनी ला झुलना मा झुलात ले
गेड़ी के धुन संगी ल सुनात ले
लईका मन के चिखला मतात ले
रही जा बरखा मन के सुहात ले
राखी अउ आठे के मनात ले
छट मा नदियां के बोहात ले
गौटनिन के तीजा पोरा आत ले
रही जा बरखा मन के सुहात ले
बरा अउ सोहारी के खाते ले
बलबला चीला के चुर जात ले
खान दे पेट भर के छकात ले
रही जा बरखा मन के सुहात ले
अरररा दतारी के जोतात ले
हरीहर थरहा के रोपात ले
बियासी के गरवा खोजात ले
रही जा बरखा मन के सुहात ले
जवान नंगरिहा के थिरात ले
बुढवा किसान के सुस्तात ले
खेती खार के काम हो जात ले
रही जा बरखा मन के सुहात ले
रचनाकार - ओम प्रकाश चन्देल
ग्राम - अवसर पाटन जिला दुर्ग
9826009205
chandelom79.blogspot.com

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