मंगलवार, 15 सितंबर 2015

मईके जवईया हे


।। मईके जवईया हे ।। 

सबके सुआरी मईके जवईया हे
गोसईया मन के अच्छा दिन अवईया हे
कुकरा,मछरी,बोकरा झन पूछ
बने पढ,ऊही डाहर घूच
दू के जगा तीन पऊव्वा,तीन के जगा चार
उन्डे हे नाली में,सुरा कस मार
ट्टटी,पोखरी म भारी सनाय हे
एक ठन पऊव्वा अकतीहा धराय हे
कोनो,जुन्ना मया आही कईके भारी खुश हे
मुँह ल कर दिस टेड़गा,तंहा टाँय-टाँय फुश हे
अरे दिवानो,ईन सबसे बोचको
मै तो कईथव,खाली मोबाईल कोचको
वाट्सअप,फेश बुक,जम के चलाव नेट
जा झट किन रिचार्ज करवा,झन कर लेट
एक बछर मा तोर अच्छा दिन आय हे
चार दिन जी ले ससन भर,पाछू बड़ बाय हे
जान ले,समझ ले,ईही हरे तोर अच्छा दीन
कब आही बाई कहिके,फ़ालतू दिन झन गिन

रचनाकार - ॠषि वर्मा 
निनवा बैकुंठ तिल्दा रायपुर 
मोबा - 90983162484 

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