।। तै काबर भूखा मारत हस।।
ढाई महिना ले सुक्खा पारके
अब तै पानी डारत हस
छत्तीसगढ के किसान ल भगवान
तै काबर भूखा मारत हस
पानी के अगोरा म धनहा
गरमी ले जरके खाक होगे
आस लगाए किसान के सपना
जड़जड़ के राख होगे
आजू बाजू के राज म बाढ़ आये हे
फेर इहां सुखा कार पारत हस
छत्तीसगढ के किसान ल भगवान
तै काबर भूखा मारत हस
सोचे रहेन एसो फसल होही त
सब बिगड़े काज बनाबो
कोनो बेटी के शादी करबो
कोनो मकान बनाबो
सबके सपना सपना रहिजय
अइसन तै कर डारत हस
छत्तीसगढ के किसान ल भगवान
तै काबर भूखा मारत हस
भूखमरी छा जाही ग इहां
पानी गर तै नइ बरसाबे
अब तो हद ले बाहर होगे
अउ तंय कतका हमला तरपाबे
जिंये के आस टूट जाही सबके
अतका तरपा डारत हस
छत्तीसगढ के किसान ल भगवान
तै काबर भूखा मारत हस
रचनाकार - गुमान साहू
ग्राम-समोदा (महानदी)
थाना-आरंग रायपुर
मोबा. - 9977213968
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