रविवार, 20 सितंबर 2015

तै काबर भूखा मारत हस


।। तै काबर भूखा मारत हस।। 

 ढाई महिना ले सुक्खा पारके
      अब तै पानी डारत हस
छत्तीसगढ के किसान ल भगवान
   तै काबर भूखा मारत हस

पानी के अगोरा म धनहा
   गरमी ले जरके खाक होगे
आस लगाए किसान के सपना
      जड़जड़ के राख होगे
आजू बाजू के राज म बाढ़ आये हे
     फेर इहां सुखा कार पारत हस
छत्तीसगढ के किसान ल भगवान
   तै काबर भूखा मारत हस

सोचे रहेन एसो फसल होही त
        सब बिगड़े काज बनाबो
कोनो बेटी के शादी करबो
  कोनो मकान बनाबो
सबके सपना सपना रहिजय
   अइसन तै कर डारत हस
छत्तीसगढ के किसान ल भगवान
   तै काबर भूखा मारत हस

भूखमरी छा जाही ग इहां
       पानी गर तै नइ बरसाबे
अब तो हद ले बाहर होगे
अउ तंय कतका हमला तरपाबे
जिंये के आस टूट जाही सबके
    अतका तरपा डारत हस
छत्तीसगढ के किसान ल भगवान
   तै काबर भूखा मारत हस

रचनाकार - गुमान साहू
 ग्राम-समोदा (महानदी)
थाना-आरंग रायपुर
मोबा. - 9977213968

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