।। जागव ।।
मोर छत्तीसगढ़ीया भाई मन
कइसे कइसे ठगावत हे
हमर भाखा बोली ल सीख के
हमीं ल बुद्धू बनावत हे
असली छत्तीसगढ़ीया मन
जांगर टोर कमावत हे
नकली बनके आहे तेमन
महल अटारी बनावत हे
असली मन ह दब्बू होके
अवाज नइ उठावत हे
दूसर राज ले आहे तेमन
अपन दबंगई देखावत हे
कब तक चलही अइसने भाई
मोर छाती ह कल्लावत हे
अपन हक के लडे खातिर बर
अब नस नस ह फडफडावत हे
जागव जागव जागव भाई
सुत के झन पहावव
मोर छत्तीसगढ़ महतारी बर
सब झन आघू आवव
जागव रे मोर छत्तीसगढ़ीया
रचनाकार - महेन्द्र देवांगन "माटी"
पंडरिया जिला कवर्धा
(बोरसी - राजिम)
मोबा.- 8602407353

बढ़िया
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