।। तोर सुरता मा आँसू बोहावत हे ।।
मेचका घलो कतका चिल्लाही
ओकरो मुहूँ सुखावत हे
तोर सुरता मा
आँसू बोहावत हे
रोपा ला पीलिया होगे
बोता घलो अँटियावत हे
तोर सुरता मा
आँसू बोहावत हे
तरिया डबरा सुक्खा पर गे
नरवा घलो थर्रावत हे
तोर सुरता मा
आँसू बोहावत हे
रूख-राई ह प्यास मर गे
साग-भाजी घलो पिलियावत हे
तोर सुरता मा
आँसू बोहावत हे
शिवनाथ,खारून के पसीना छुट गे
महानदी घलो सुखावत हे
तोर सुरता मा
आँसू बोहावत हे
बाँगो अऊ दर्री के टोंटा सुखा गे
गँगरेल के घलो मुहुँ चोपीयावत हे
तोर सुरता मा
आँसू बोहावत हे
बोड़ा अऊ फुटू नँदा गे
कुन्दरू खेकसी नार अईलावत हे
तोर सुरता मा
आँसू बोहावत हे
मेचका घलो कतका चिल्लाही
ओकरो मुहूँ सुखावत हे
तोर सुरता मा
आँसू बोहावत हे
रचनाकार - सकून साहू
शालिनी शैली साहू
कुरूद जिला - बेमेतरा

बहुत सुग्घर रचना बर बधाई।सही मे पानी बिना सब सुन हे
जवाब देंहटाएंबहुत सुघर रचना हे दीदी सही म पानी के अड़बड़ महातमय हे
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