गुरुवार, 5 नवंबर 2015

कब सिताही


कब--सिताही
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मंहगाई के सुरसुरी ह जरत हे
लूटखसोट के बत्ती ह जगर-बगर बरत हे
बेरोजगारी के अनारदाना छरछरावत हे
जलइया के अन्तस् हा भरभरावत हे
घोटाला के बम धड़ाम-धड़ाम फूटत हे
भ्रष्टाचार के रॉकेट ह साँय-साँय छुटत हे
आतंकी चुटचुटिया चुट-चुट चुटीयावत हे
नक्सली गोली साँप ह भारी अंटियावत हे
घुंसखोरी के चड़चड़ी हे
नशाखोरी के लड़ी हे
गरीबी के चकरी ह रठ्ठ घूमत हे
देख तो देखइया मन कतका झूमत हे
फेर शान्ति के गेसबत्ती ह जरत नईये
भाईचारा के टिकली ल कोनो फोरत नइये
सुंदर माटी के दिया अब पिसान होगे
काल लइका अब सियान होगे
गुनत हे ऋषि,अईसन दिन ह कब सिराही
अईसन फटाका के बत्ती ह कब सिताही
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रचनाकार - ऋषि वर्मा 
निनवा बैकुंठ तिल्दा रायपुर 
मोबाईल :- 9009087489 

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