शनिवार, 7 नवंबर 2015

मया के दीया



मया के दीया
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बारव संगी मया के दीया,
आये हे तिहार देवारी।
ओरी-ओर रिगबिग ले,
भागय अंतस ले अंधियारी।

बंधा जवव पिरित डोरी म,
ऊंच-नीच के करव सफाई।
सुर मिलावव सूरहूत्ती म,
सुवा गीत संग बहिनी भाई।
बगरय अंजोर सबके अंगना,
कूंदरा होवय कि महल अटारी।
बारव......

जुरमिल करव लछनी के पूजा,
मनुसता के मिठई ल बांटव।
पागव पकुवा गुरतुर बोली के,
ईरखा के कनौजी झन चांटव।
नान्हे बड़का सबो ल पूरय,
भाईचारा के फरा सोंहारी।
बारव......

सत्-ईमान के होवय धमाका,
लबारी ल चुल्हा म डारव।
बांह जोर नाचव राउत नाचा,
सुनता-सलाह के दोहा पारव।
मिलव भेंटव लगाव गोरधन टीका,
परसन होही छत्तीसगढ़ महतारी।
बारव...
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रचना - मनीराम साहू 'मितान'
कचलोन सिमगा बलौदाबाजार 
मोबाईल :- 98261 54608

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