शुक्रवार, 25 दिसंबर 2015

हमर महतारी


 हमर महतारी
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त्रेता युग ले लेके कलजुग तक
करम ठठाईस महतारी ग
मोहमाया म भुलाके
रोईस दुनियादारी ग

गली गली म घुमय संगी
लईका ल कोरा म रख के नारी
दुख पीरा ल भुला गे
अईसन सुघ्घर हावे हमर महतारी

पढ़े हावव किताब म संगी
अहिल्या,कौशिल्या के नाम ग
ममता मयी महतारी के
बड़ सुघ्घर हावे काम ग

नव महीना ले रखे कोरा म
राखिस हमला जतन के
पांच बरस के होवत ले
दूध पिलाईस अपन तन के

अईसन मां के बेटा बने बर
जग म आईस राम
राम के नाम अमर होगे
जानिस लोगन आम

सब ले सुग्घर सब ले पियारी
अईसन सुघ्घर हावे हमर महतारी
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रचनाकार - राजेश निषाद 
ग्राम - चपरीद (समोदा)
मोबाईल - 9713872983

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