माटी गुरूजी के मया
--------------------------------
कविता म सांझा-बिहनिया बुड़े रहिथे
महेंद्र देवांगन "माटी" जी ओखर नाव हे
छत्तीसगढ़ी कविता ल बगरावत हे
पत्र अउ पत्रिका मन के दुवारा
कबीरधाम पंडरिया ओखर गांव हे
गुरु जी कहिके लईक मन बुलाये
कहे गुरुजी ला सबो दिन परनाम हे
गियान के भरे ओकर कर भंडार हे
सबो लईक सियान के आवय कम रे
मया दुलार करथे सबो झन करा
तभे तो भईया माटी गुरूजी मिले हे नाव रे
छत्तीसगढ़ी म तो बगराये अपन ग्यान रे
सबो कवि भाई के करे अब्बड़ सम्मान रे
महेंद्र देवांगन 'माटी' मयारू माटी भईया
ओखर नाव हे। 'माटी' ओखर नाव हे
--------------------------------------
रचनाकार - अनिल पाली
तारबाहर बिलासपुर
मोबाइल - 7722906664

धन्यवाद अनिल पाली जी रचना बर अऊ देव लहरी ल भी बहुत बहुत धन्यवाद प्रकाशन बर
जवाब देंहटाएंधन्यवाद अनिल पाली जी अऊ देव लहरी जी
जवाब देंहटाएं