देस बर जीबो देस बर मरबो
चल माटी के काया ल,हीरा करबो।
देस बर जीबो, देस बर मरबो।
सिंगार करबों,सोन चिरंईया के।
गुन गाबोंन, भारत मईया के।
सुवारथ के सुरता ले, दुरिहाके।
धुर्रा चुपर के माथा म,भुईंया के।
घपटे अंधियारी भगाय बर,भभका धरबो।
देस बर जीबो, देस बर मरबो।
देस बर जीबो, देस बर मरबो।
उंच - नीच ल, पाटबोन।
रखवार बन देस ल,राखबोन।
हवा म मया, घोरबोन।
हिरदे ल हिरदे ले, जोड़बोन।
रखवार बन देस ल,राखबोन।
हवा म मया, घोरबोन।
हिरदे ल हिरदे ले, जोड़बोन।
चल दुख-पीरा ल, मिल हरबो।
देस बर जीबों, देस बर मरबो।
देस बर जीबों, देस बर मरबो।
मोला गरब-गुमान हे,
ए भुईंया ल पाके।
खड़े रहूं मेड़ो म ,
जबर छाती फईलाके।
फोड़ दुहुं वो आँखी ल,
जे मोर भुईंया बर गड़ही।
लड़हु-मरहु देस बर ,
तभे काया के करजा उतरही।
ए भुईंया ल पाके।
खड़े रहूं मेड़ो म ,
जबर छाती फईलाके।
फोड़ दुहुं वो आँखी ल,
जे मोर भुईंया बर गड़ही।
लड़हु-मरहु देस बर ,
तभे काया के करजा उतरही।
तंउरबों बुड़ती समुंद म,उक्ती पहाड़ चढ़बो।
चल देस बर जीबो, देस बर मरबो।
चल देस बर जीबो, देस बर मरबो।
रचना - जितेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"
बाल्को (कोरबा) 09981441795

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