नवा जमाना आगे
जुन्ना जुन्ना चलन नदागे
आधुनिक फैशन ह छागे
तईहा के बात ल बईहा लेगे
नवा जमाना आगे.
संगी नवा जमाना आगे..............
बिन फटफटी के चेलिक ह
तरिया घलऊ नई जावय
बिन मेकअप के मुटयारी ह
डेहरी तलुक नई निकलय
मान गऊन सतकार भूलागे
एदे लाज सरम ह हजागे.............
दाई-ददा कुरिया म फेकागे
कुकुर ल सोफा म सुतावत हे
बिचार, बेवहार चुल्हा म जाय
देखावा ह सबला ओरावत हे
फोक्कट के खाना मइनखे ल भागे
मेहनत ले भागे, आलस हमागे.......
सबला ल पडे हे मतलब के अपन
मया पिरीत होगे जी खेलवारी
छोकरा डोकरा सब मोबाईल धरे
एकर बिना अटके बुता संगवारी
मांस मदिरा सहज होगे
संयुक्त परिवार ह सिरागे...........
रचना - महेतरु मधुकर
पचपेडी, मस्तूरी, बिलासपुर

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