मंगलवार, 30 अगस्त 2016

मै फेर लईका बन जातेव


मै फेर लईका बन जातेव

हे राम कांही तै अइसे कर              पतंग के डोरी म बांध के
मै फेर लईका बन जातेंव।              मन अगास ल छू आ जातेंव
फेर वोही ददा के खंधईय्या             हे राम कांही तै अइसे कर
अउ दाई के अंचरा पाजातेंव।।        मै फेर लईका बन जातेंव।।

खाय कमाय के चींता ले                बड़े बड़े मनखे ल देखके 

रहितेंव मै हा दुरिहा।                     मन मे डर हा अमागे।
भौरा-बाटी म दिन कटतिस            कइसे कटही ये जिनगी
सब खेलतेन संगी जहुरिया।।          फीकर ह माथा म छागे।।

पाप पुन्य ले रहितेव अंजान            काला कहिथे झुठ लबारी 

मन निर्मल पा जातेंव।                   कभु जान नइ पातेंव।
हे राम कांही तै अइसे कर               हे राम कांही तै अइसे कर
मै फेर लईका बन जातेंव।।             मै फेर लईका बन जातेंव।।

फेर चंदा ल ममा कहितेंव              जवानी के लेवा म जी

फेर दुध के भरे कटोरी।                तन मन ह मोर सनाये
रतिहा चंदैनी ल गीनत रतेंव           बुढ़ापा ह दुख म बुड़े 
वो बताशा वाले लोरी।।                काल घलो दुरिहाये।।

दाई के छाती म लगे लगे               करिया बलहा चितकबरा 
ससन भर मै सो जातेंव।                मन ल नइ रंगातेंव।
हे राम कांही तै अइसे कर               हे राम कांही तै अइसे कर
मै फेर लईका बन जातेंव।।             मै फेर लईका बन जातेंव।। 

सब के मया दुलार पातेंव               रचनाकार - फन्नू बैरागी जी

सुख से दिन ह कट जातिस।          'भजन सम्राट' बंदोरा
राम रहीम के पाठ ह।                    जिला - कबीरधाम कवर्धा
मोर जिनगी मे उतर आतिस।।         संपर्क - 9179496846

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