आज के बेंदरा
बिचके हाबय बेंदरा तीन
नाचय तिनक ता धिना धिन
गांव गांव अऊ शहर शहर
पारा मुहल्ला डहर डहर
सब्बो जगा म धाक जमाये
लोगन मन में डर हमाये
का अदालत का कछेरी
दिन रात हे हेरा फेरी
बेंदरा मन आज बुरा देखत हे
भैरा बेंदरा फुसियाय ल सुनत हे
कोंदा बेंदरा बड़ लपरहा
अकड़म बकड़म बोलय चटरहा
बेंदरा मन संसद मा कूदत हे
दिन दहाड़े जनता ल लूटत हे
बेटी बहिनी थर्राये हाबय
निकले बर घर ले डर्राये हाबय
आजा बापू अब तो आजा
बेंदरा मन ल अऊ सिखा जा
बेंदरा मन अब कुकुर होवत हे
जीवरा धुकुर पुकुर होवत हे
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रचनाकार - ऋषि वर्मा
निनवा बैकुंठ तिल्दा रायपुर
मोबाईल - 9009087489
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