शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2015

नारी के पीरा


नारी के पीरा

 अतयाचारी मन आज भी बईठे
   बजबजावत नाली कस कीरा 
            देखत मन कलप जाथे
        नई सहावय नारी के पीरा

       कतको रावण बईठे ईहा 
          ताक़त हाबय सीता ल
 दुरपति के चीरहरण होवत हे
     का गोठियाबे फरहीत्ता ल

 कतको कालनेमी राक्षस बईठे
              बन के साधु भेस मे
    नारी ल जिंहा देवी मानथन
    का होवत हे अइसन देश मे

 कतको निरभया शिकार होगे
   अइसन शईतान शिकारी के
     सबो के बहिनी बेटी हाबय
       सम्मान कर लव नारी के
▫  ▫ ▫ ▫ ▫ ▫ ▫ ▫ ▫ ▫ ▫ ▫ ▫ ▫ ▫ 

रचनाकार - अशोक साहू 
         भानसोज आरंग रायपुर 
मोबा.- 9685704705

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