नारी के पीरा
अतयाचारी मन आज भी बईठे
बजबजावत नाली कस कीरा
देखत मन कलप जाथे
नई सहावय नारी के पीरा
कतको रावण बईठे ईहा
ताक़त हाबय सीता ल
दुरपति के चीरहरण होवत हे
का गोठियाबे फरहीत्ता ल
कतको कालनेमी राक्षस बईठे
बन के साधु भेस मे
नारी ल जिंहा देवी मानथन
का होवत हे अइसन देश मे
कतको निरभया शिकार होगे
अइसन शईतान शिकारी के
सबो के बहिनी बेटी हाबय
सम्मान कर लव नारी के
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