गुरुवार, 8 अक्टूबर 2015

दाई ददा हे सरग के दूआरी


"दाई-ददा हे सरग के दूआरी"

सुरता लव इखर मया के छाँव म मन म मूरत भरलव ग
दाई-ददा के सेवा सरग के दूआरी सेवा ल इखर करवव ग

जनम देइन हे कोख म अपन हमला नौ महिना ले राख के
अंगूरी धर के रेंगना सिखोइन हमर नखरा सहिन लाख हे
सुत उठके बड़े बिहनिया पइयां ल इखर परलव ग
दाई-ददा के सेवा सरग के दूआरी सेवा ल इखर करलव ग

भोजन कराइन हमला एमन अपन मन भूखन रहि के
पढ़ा लिखाके काबिल बनाइन हमर कतको दूख ल सहि के
हमर उपर हे इखर दूध के करजा सुरता ल सबो करलव ग
दाई-ददा के सेवा सरग के दूआरी सेवा ल इखर करलव ग

जम्मो दूख ल सहिन हमर अपन पीड़ा मान के
घाम प्यास के बचाके रखिन अपन करेजा के टूकरा जान के
सेवा हे इखर सरग निसैनी सेवा करके सबो चढलव ग
दाई-ददा के सेवा सरग के दूआरी सेवा ल इखर करलव ग

छाती ले लगाके राखिन हमला अउ देइन मया दूलार हे
इखर बिना जिनगी के कल्पना करना घलो बेकार हे
दाई-ददा के गोड़ के धूर्रा माथ म अपन मढ़ लव ग
दाई-ददा के सेवा सरग के दूआरी सेवा ल इखर करलव ग

रचनाकार - गुमान प्रसाद साहू
समोदा(महानदी) आरंग रायपुर 
मोबा. - 9977213968 

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