चलव लुए जाबो धान
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सोनहा कस हे धान के बाली
देखत मन मुसकावत हे
चलव लुए जाबो धान भाई
मन ह ददरिया गावत हे
दीदी भउजी काकी मन ह
हाथ म हंसिया धर के जावय
लउहा लउहा धान ल लुए
ओरी ओरी करपा मढावय
पईरा डोरी धरे कका मंगलु
बांधत हाबय सुग्घर भारा
बईला गाड़ी म भरय भराही
लानत हाबय अपन बियारा
मिंज कुट के कोठी भरबो
मिहनत के फल ल पाबो
लक्ष्मीदाई ल घर मे लाबो
सुग्घर खाबो अउ कमाबो
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रचनाकार - अशोक साहू
भानसोज आरंग रायपुर
मोबा.- 9685704705

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