गुरुवार, 10 दिसंबर 2015

जेन घर सियान तउन सरग कहाथे


जेन घर सियान तउन सरग कहाथे
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कोचराय हे देहे ,पेचके हे गाल
निहरे हे कनिहा, पाका हे बाल
मइलहा हे पटकू,चिरहा हे धोती
बबा रिसायहे जाने काखर सेती

बड़ देर होगे आज बडबड़ात हे
कोंटा म बइठके आँसू बोहात हे
लागथे बेटा ह फेर खिसियाय हे
धुन बहु कुछु नाव ले बगियाय हे

पाछु पंदरही बहू कतका सुनाइसे
तसमा का टुटगे नगत झरराइसे
भूखे पियासे तालाबेली दे रहिसे
जुड़ म बपरा परछी म सोय रहिसे

बहू-बेटा कोनो दया नइ खाइस
बपरा सोगे भीतर नइ बलाइस
नाती ल खेला खुस हो लेत रहिसे
अपन छाती ल जुड़ो लेत रहिसे

नाती ल  खेलाय बर बरज दिस
जीए के ओखी म पथरा चपक दिस
रही-रही बबा ल बीते दिन सुरता आथे
डोकरी के सुरता म मन कलप जाथे

अपन भाग ऊपर बिचारा बड़ पछताथे
जब-जब रोथे तब डोकरी ल गोहराथे
काबर लईका आज सियान ल रोवाथे
जेन रुख छाव देथे उही ल काट गिराथे

जेन घर सियान तउन सरग कहाथे
एला दुःख देवइया कहाँ सुख पाथे
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रचनाकार - सुनिल शर्मा"नील"
थानखम्हरिया जिला - बेमेतरा
संपर्क नंबर - 7828927284
रचना दिनाँक - 09/12/2015

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