भुइंया के बटवारा
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बटागे जम्मो खेती किसानी
अउ बटागे बियारा
तारी नई पटत हे भाई-भाई म,
घर दुआर के करत हे बटवारा
बटागे घर के कोंटा-कोंटा
नई बाचिस कोनो किनारा
घर के छानी, खपरा के,
होवत हे बटवारा
गिनागे थारी लोटा घर के
तमाशा देखे सब्बो पारा
रोस-रोस म दाई-ददा के घलो,
कर डारिन बटवारा
चारो कोती कुलुप अंधियार
होही कइसे उजियारा
कुटका-कुटका घर के करके,
कर डारिन बटवारा
बाटत-बाटत देश बटागे
हर घर म अब होवत हे बटवारा
जाति, धरम के नाम म होगे,
भुइंया के बटवारा
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रचनाकार – तरुण बारले
धनसुली बाराडेरा रायपुर
मोबा. :- 9009191035

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