शनिवार, 27 अगस्त 2016

छत्तीसगढ़ के तिहार देख ले


तिहार देख ले

आ हमर गांव के, तिहार देख ले।
सुग्घर लीपे-पोते, घर दुवार देख ले।

काय हरे हरेली, काय हरे तीजा-पोरा।
कोन-कोन तिहार बर, कईसन होथे जोरा।
झुमय नाचे सबो झन, मिन्झरे पिंयार देख ले।

राखी पुन्नी सवनाही , सोम्मारी कमरछठ।
रांध के खीर बरा-सोहारी, खाथे सबो छक।
झुलना झूलेआठे-कन्हैया, मिंयार देख ले।

मुसवा संग मुस्काये, गली-गली गनपति।
जस गाये दाई दुर्गा के, मनाये सरसती।
राम जी के जीतई अउ, रावन के हार देख ले।

रामधुनी रामसत्ता, भागवत रमायेन।
दियना देवारी के, जगमग जलायेन।
परसा संग माते, नाचे खेत-खार देख ले।

पूजा-पाठ बर-बिहाव, मड़ई अक्ति छेरछेरा।
सुवा-करमा नाचा-गम्मत म, बीते कतको बेरा।
नांव के तिहार नही, इहां सार देख ले।

रचना - जीतेंद्र वर्मा (खैरझिटिया)
बाल्को नगर कोरबा छत्तीसगढ़ 

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